रामपुर क्षेत्र के किसानों ने प्रबंधन और प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
खदान बंद करने की दी चेतावनी
रामपुर क्षेत्र के किसानों ने प्रबंधन और प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, खदान बंद करने की दी चेतावनी
अनूपपुर। रामपुर, बटुरा, बिछिया और अटरिया क्षेत्र के किसानों ने पुनर्वास, पुनर्स्थापना, रोजगार एवं परिसंपत्तियों के मुआवजे की लंबित मांगों को लेकर प्रबंधन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए गहरी नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी बैठक, आमसभा या अन्य गतिविधि में भाग नहीं लेंगे।
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा लंबे समय से रोजगार, पुनर्वास और संपत्तियों के मुआवजे के मामलों में लापरवाही बरती जा रही है। कई बार आंदोलनों और बैठकों के दौरान 15 दिन, एक माह अथवा दो माह के भीतर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक अधिकांश मामलों का निराकरण नहीं हो पाया है।
किसानों ने बताया कि जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में सोहागपुर हाउस में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भी विभिन्न मामलों के निराकरण के लिए समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन तय समय के बाद भी कार्य पूरे नहीं हुए। उनका आरोप है कि इस संबंध में जिला प्रशासन को भी वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।
किसानों का कहना है कि रोजगार के मामलों में कुछ प्रगति अवश्य हुई थी, लेकिन महाप्रबंधक (भू-राजस्व) बी.के. लाल के कार्यभार संभालने के बाद रोजगार प्रक्रिया की गति धीमी हो गई है। किसानों ने आरोप लगाया कि नए रोजगार प्रकरणों में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि पुनर्वास, पुनर्स्थापना, रोजगार और परिसंपत्तियों के संपूर्ण मुआवजे की कार्रवाई शीघ्र पूरी नहीं की गई तो वे खदान को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों ने स्पष्ट कहा कि आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और प्रबंधन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांति मनमोहन चौधरी, जनपद सदस्य कुमार तिवारी, किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा, पूर्व सरपंच झोले बैगा, पूर्व सरपंच प्रमोद बैगा, उपसरपंच बिछिया सहित शिवप्रसाद चौधरी, त्रिवेणी राव, गुलजार राठौर, उधो साहू, ललन साहू, राजकुमार साहू, नारायण बैगा, नीलकंठ केवट तथा सैकड़ों ग्रामीण एवं किसान उपस्थित रहे।
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